Jacksonville, Florida

काम की बात: क्या नॉमिनी ही होता है उत्तराधिकारी? जानिए क्या कहता है नियम और क्या हैं इनके अधिकार

कई लोगों को लगता है कि हम जिसे नॉमिनी बनाते हैं, वही हमारा उत्तराधिकारी भी होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। उत्तराधिकारी और नॉमिनी में बेहद अंतर है।
 
क्या नॉमिनी ही होता है उत्तराधिकारी? 
किसी व्यक्ति के जीवन का केंद्र बिंदु उसका परिवार ही होता है। उसकी हरेक गतिविधि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए होती है। परिवार का भविष्य सुरक्षित हो, इसके लिए ही वह बैंक बैलेंस बनाता है, बीमा कराता है। जब भी आप प्रॉपर्टी, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड्स, बैंक डिपॉजिट्स आदि में निवेश करते हैं, तो आपसे नॉमिनी का नाम पूछा जाता है। बैंक, बीमा समेत अन्य आवेदन करते वक्त आपको एक फॉर्म दिया जाता है, जहां आप अपने नॉमिनी के बारे में जानकारी दे सकते हैं। लेकिन क्या नॉमिनी आपकी संपत्ति का वारिस भी होता है? कई लोगों को लगता है कि हम जिसे नॉमिनी बनाते हैं, वही हमारा उत्तराधिकारी भी होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। उत्तराधिकारी और नॉमिनी में बेहद अंतर है, जो आपके लिए जानना बेहद आवश्यक है।
 
कौन होता है नॉमिनी?
कानूनन नॉमिनी वह व्यक्ति है, जो आपकी मृत्यु के बाद बैंक, कंपनी से मिली रकम को आपके कानूनी वारिसों तक पहुंचाता है। वह कानूनन उस रकम का मालिक नहीं होता, सिर्फ एक ट्रस्ट होता है। नॉमिनी सिर्फ आपके पैसों का केयरटेकर होता है, न कि मालिक। ऐसे में जानना जरूरी है कि नॉमिनी और उसके अधिकार क्या हैं। 
 
कौन होता है उत्तराधिकारी?
संपत्ति के मालिक की मृत्यु के बाद उसके संबंधियों को संपत्ति सौंप दी जाती है। जन्म ग्रहण करने के साथ-साथ पैतृक संपत्ति पर उत्तराधिकार प्राप्त होता है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार पुत्र, पुत्री, विधवा, मां क्लास-1 उत्तराधिकारी में आते हैं। वहीं पिता, पुत्र व पुत्री का बेटा व बेटी, भाई, बहन, भाई व बहन की संतान क्लास-2 में आते हैं। 
 
नॉमिनी बनाना क्यों जरूरी?
संपत्ति के मालिक को किसी न किसी को नॉमिनी जरूर बनाना चाहिए। वरना अन्यथा मृत्यु होने के बाद कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। अगर नॉमिनी का नाम न हो तो जमा राशि पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसके लिए कानूनी कार्रवाई काफी लंबी होती है। अक्सर कुछ हजार रुपयों के लिए लोग इस झंझट में पड़ते ही नहीं हैं। नियम के तहत नॉमिनी का मालिकाना अधिकार नहीं होता। नॉमिनी सिर्फ बैंक से पैसे निकाल सकता है और उसके लिए उसे अधिकृत किया गया है।
 
क्या है क्लास-1 और क्लास-2 उत्तराधिकारी में अंतर?
अगर किसी ने अपनी कमाई बैंक में जमा की हुई है और खाते में किसी को नॉमिनी बनाया है, लेकिन अपनी संपत्ति की वसीयत नहीं की है, तो ऐसी स्थिति में शख्स की मौत हो जाने पर नॉमिनी बैंक से पैसे निकालकर क्लास-1 उत्तराधिकारी को देता है। सभी क्लास-1 उत्तराधिकारियों का पैसे पर बराबर का हक होता है। लेकिन अगर क्लास-1 उत्तराधिकारियों में से कोई नहीं है, तो क्लास-2 उत्तराधिकारियों में बंटवारा किया जाता है।